Amit Ratta

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तब याद आई मां मुझे -15-Dec-2023

ठोकर लगी जब गिरा

जब जब चली गर्म हवा

धूप रही थी तपतपा

न मिली ठंडी छाँव मुझे

तो याद आई मां मुझे।।


भूखा जब प्यास लगी

हर खुशी निराश लगी

जिंदगी थी उदास लगी

सबने कर दी नां मुझे

तो याद आई मां मुझे ।।


जो खाली बिस्तर दिखा

जब हांडी माखन दिखा

जब सूना आंगन दिखा

दिखा खाली चूल्हा मुझे

तब याद आई मां मुझे।।


जब कोने में लाठी दिखी

बो लोहे की दराती दिखी

वो पीतल की बाटी दिखी

जिसमे देती  खाना मुझे

तब याद आई मां मुझे।।


मां की जब छड़ी दिखी

चप्पल कोने पड़ी दिखी

आंगन में वो खड़ी दिखी

जब आया सपना मुझे

तब याद आई मां मुझे।।


          अमित रत्ता

    अम्ब ऊना हिमाचल प्रदेश….

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5 Comments

Gunjan Kamal

16-Dec-2023 10:30 AM

👏👌

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बेहतरीन अभिव्यक्ति

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नंदिता राय

15-Dec-2023 05:49 PM

Nice one

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